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How to stop kids being addicted to Mobile phones?

Mobile phone addiction

Hello Fellows,

How to stop kids being addicted to Mobile phones? या बच्चों को मोबाइल की लत कैसे छुड़वायें यह एक बड़ा प्रश्न हो सकता है लेकिन उन्हें यह लत पड़ी कैसे यह जानना भी उतना ही आवश्यक है।

बचपन में हम पढ़ते थे “A Machine is something that reduces human effort” अर्थात जो मनुष्य का समय बचाए उसे मशीन कहते हैं समय के साथ साथ हम बड़े हुए तकनीकी विकास की देन स्वरुप हमने पेजर से बेसिक मोबाइल फ़ोन और Nokia 3310 जैसे फ़ोन से  स्मार्ट फ़ोन के युग में प्रवेश कर लिया, छुक-छुक करती रेलगाड़ी से मेट्रो और मेट्रो से बुलेट ट्रेन के सपनों को साकार होते देख रहें हैं, अन्तरिक्ष में केवल जाना ही नहीं बल्कि बड़े बड़े देशों के सैटेलाइट्स भी पृथ्वी कक्षा में स्थापित करने लगे हैं।

प्रश्न यह उठता है कि तकनीक का उपयोग तो हमेशा से समय बचाने के लिए किया जाता रहा है ताकि मनुष्य जाति को लाभ मिल सके और कठिनतम कार्य को सरलता से किया जा सके। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि नए नए गैजेट्स आने के बाद भी हम अपने लिए और अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते। याद कीजिये जब हमारे माँ-बाप नौकरी करते थे तो शाम को घर आने के बाद हमें उन दोनों का अटेंशन मिलता था। लेकिन आज यदि 5 लोग घर पर हैं और वे सब मोबाइल फ़ोन यूजर्स हैं तो शायद ही कुछ समय बैठकर एक-दूसरे से बात भी करते होंगे।

याद है न,सोने से पहले दादा-दादी कहानी सुनाते थे, लाइट के चले जाने पर सभी घर के सदस्यों ने एक साथ बैठना और अपनी अपनी लाइफ के किस्से सुनाना, केवल गर्मी की छुट्टियों में ही नहीं बल्कि हर रोज़ स्कूल का होम वर्क कर लेने के बाद इकट्ठे होकर छुप्पन-छुपाई, पकड़न-पकड़ाई, क्रिकेट, कैरम बोर्ड, ताश खेलना, पतंग उड़ाना, पार्क में जाना आदि अनेक प्रकार activities से जीवन जीवंत रहता था और आज उससे बिल्कुल उलट हो गया है क्रिकेट के बड़े बड़े ग्राउंड्स, ताश की गड्डियां, कैरम बोर्ड जैसे खेल मोबाइल फ़ोन की एप्लीकेशनों में समा चुके हैं।

याद कीजिये अपने बचपन को जब आप खाना नहीं खाते थे तो माँ-बाप हमें खाना खिलाने के ना जाने कितने तरीके ढूंढते थे। कभी रूठ जाते थे, हमारे पीछे भागते थे, टीचर से शिकायत करते थे, घर में बड़ों का रोब दिखाते थे और तब भी कुछ नहीं होता था तो 2-5 रुपये देकर टिका देते थे और यदि आज बच्चा खाना नहीं खाता तो हम मोबाइल लाकर उसे दे देतें हैं ताकि बच्चा खाना चैन से खा सके और हम अपनी जान छुड़ा सकें। तेज़ भागती जिंदगी में हम कब अपनी जिम्मेवारियों से मुंह मोड़ने लगे हमें पता तक नहीं चला।

माँ बाप का पहला उद्देश्य बच्चे का चरित्र निर्माण करना चाहिए, उसे अच्छे संस्कार देने चाहिए। लेकिन आज जब एक स्कूल ना जाने वाला बच्चा भी मोबाइल की चपेट में आ जायेगा तो क्या संस्कार ग्रहण कर पायेगा?

हाल ही में एक विडियो देखने को मिला जिसमें एक छोटी बच्ची मोबाइल की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगो के चपेट में आ जाने के कारण ठीक ढंग से चल भी नहीं पाती और मोबाइल ना मिले तो उसे दौरे पड़ने लगते हैं वह विडियो आप नीचे देख सकतें हैं।

तो आइये जानतें हैं कि ऐसे क्या प्रयास किये जायें जिससे आपका बच्चा एक मशीन ना बनकर एक अच्छा इंसान बने। और जानें कि How to stop kids being addicted to Mobile phones?

बच्चों के साथ समय बिताएं : कितनी भी भागती जिंदगी क्यों ना हों माँ बाप, दादा-दादी और नाना-नानी का प्यार जरूर मिलना चाहिए। अगर वह भी संभव नहीं है तो समझिये कि बचपन बड़ा चंचल होता है नयी नयी चीज़ों के प्रति आकर्षित होता है पार्क में जाना अन्य बच्चों से मिलना, outdoor-games में अपने kids का interest develop करना अत्यंत आवश्यक है। मेरा व्यक्तिगत अनुभव यह कहता है कि मेरा भांजा “गर्वित” जिसका cows में बड़ा इंटरेस्ट है “गौशाला” ले जाने पर बड़ा खुश होता है और किसी भी तरह कि जिद्द करने पर उसके नाना उसे पार्क, मंदिर, गौशाला आदि स्थानों की सैर करवा के मोबाइल से जितना हो सके दूर रखते हैं 🙂

बच्चों के सामने मत करें मोबाइल का इस्तेमाल : ध्यान रहे कि आपका पूरा टाइम आप अपने बच्चों को ही दें, माता पिता की mutual understanding आपको अपने कार्य करने के लिए भरपूर समय दे सकती है और यदि मोबाइल का इस्तेमाल आपको करना ही है तो बच्चों के सो जाने के बाद ही करें।

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घर के कामों में लें मदद : खाना बनाते समय, बाइक धोते समय, आप अपने बच्चों की क्षमतानुसार मदद ले सकतें हैं। (उदाहरण के लिए अगर मेरी मदद करेगा/करेगी तो रिवॉर्ड के तौर पर उसे कुछ दिया जा सकता है)

एक्स्ट्रा activities में develop करें इंटरेस्ट : जितनी उंगलिया आपके बच्चे ने मोबाइल पर घुमानी हैं उतनी अगर किसी गिटार, हारमोनियम, ड्रम आदि पर घुमाई जायें तो हो सकता है ये सब शौक उसका करियर decide करने में मददगार साबित हो जायें। इसलिए बेहतर यही होगा कि पेंटिंग, म्यूजिक, सिंगिंग आदि क्लासेज join करवा कर रचनात्मक शक्ति का विकास किया जाये।

पालतू जानवर से जोडें emotions: कई बार क्या होता है कि बाल्यकाल में बच्चा ईश्वर द्वारा बनाई गयी सृष्टि से निरंतर अचंभित रहता है और अपने से अलग एवं नए creatures के प्रति आकर्षित रहता है। अगर आपके घर में स्थान है तो घर में गाय, कुत्ता आदि पालकर भी बच्चे को किसी की फ़ीलिंग्स, emotions की पहचान करवाई जा सकती है।

मूर्ख बनाकर करें distract: आजकल मोबाइल फ़ोन में बहुत सी एप्लीकेशन डाउनलोड की जा सकती हैं जिसमे cracked screen आदि प्रमुख हैं और “मोबाइल टूट गया है” कहकर बच्चे को मूर्ख बनाया जा सकता है। (हालाँकि यह ट्रिक थोड़े बड़े बच्चों पर काम नहीं करती)

झूठा प्रॉमिस ना करें : किसी काम को करने के बाद आप कई अपने बच्चे को कह देतें हैं कि अगर तुमने ये टास्क achieve किया तो मोबाइल मिल जाएगा परन्तु अगर आप उसे किसी भी कारणवश मोबाइल ना दे पाए तो बच्चे में माँ बाप के प्रति नकारात्मक सोच का विकास होता है।

इसी श्रृंखला में आपके सुझावों को भी स्थान दिया जाएगा, कृपया हमें जरूर लिखें।

आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी कृपया हमें hellonewsfellow@gmail.com पर ईमेल करके अवश्य बताएं। यदि आपके पास भी ऐसे ही ज्ञानवर्धक जानकारी उपलब्ध है हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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