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Blood Pressure के प्रति हमारी ग़लतफहमियां:Myths about Blood Pressure

Hello Fellows,

25 नवम्बर 2018 को मुंबई में हुई 70th Annual Conference of the Cardiological Society of India (CSI) में प्रस्तुत एक रिपोर्ट में यह पाया गया कि भारत में हर पांच में से एक व्यक्ति उच्च रक्तचाप से ग्रसित है अर्थात 8 करोड़ लोग जो कि यूनाइटेड किंगडम की कुल जनसँख्या से भी बहुत ज्यादा है।

और सबसे बड़ी बात यह है कि 40 वर्ष से कम आयु के लोगों में भी ब्लडप्रेशर की समस्या आम होती जा रही है। अमेरिका में हर 3 में से एक व्यक्ति उच्च रक्तचाप से पीड़ित है जो भारत की तुलना में भी अधिक है। हाई ब्लडप्रेशर के यदि सही समय पर उपचार न किया जाये तो हार्ट अटैक, किडनी सम्बंधित रोग आदि हो सकतें हैं। इसके साथ ही हाई-कोलेस्ट्रोल से ग्रसित व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होना आम बात है और हार्ट अटैक आदि रोगों के साथ साथ ब्रेन हैमरेज की  संभावना भी उत्पन्न हो सकती है।

आश्चर्य इस बात पर होता है कि हाई ब्लड प्रेशर होने के बावजूद बहुत से लोगों को ऐसा भी कहते सुना है “मैं ठीक हूँ मुझे फील नहीं होता” और ऐसा इसलिए भी हो सकता है कि उम्र कम होने के कारण आपकी बॉडी की प्रतिरोधक क्षमता या “resistance power” इतनी है कि आपका शरीर उसे सहन कर जाता है। लेकिन ध्यान रहे हाई ब्लड प्रेशर हो या शुगर ये बीमारियाँ  दीमक की तरह आपके शरीर को खोखला करती रहती हैं और सही समय पर इसका उपचार ना किया जाये तो परिणाम घातक हो सकतें हैं।

High Blood Pressure का दूसरा नाम Hypertension भी है हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना ही इसका सबसे उत्तम उपचार है। हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित व्यक्ति को अपने भोजन में से नमक की मात्रा को कम करना अनिवार्य है इसके अलावा प्रतिदिन व्यायाम, तंबाकू पदार्थों से दूरी, वजन कंट्रोल, अच्छी नींद और व्यर्थ के स्ट्रेस से दूर रहकर भी हाई ब्लड प्रेशर से बचा जा सकता है। यदि उपरोक्त बदलाव हम अपनी जीवन-शैली में नहीं ला सकते तो नियमित रूप से अपनी दवाइयों का सेवन करने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

इस पोस्ट में हम आपसे वे सभी गलतफहमियां discuss करना चाहतें हैं जो अक्सर हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति को होती हैं।

ग़लतफहमी : घबराहट, नींद ना आना, बहुत पसीना आना आदि सब हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण हैं लेकिन मेरे साथ तो ऐसा कुछ नहीं होता इसलिए मैं ठीक हूँ।

सच्चाई : मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर के कोई ख़ास लक्षण नहीं होते। अमेरिका में हर 3 में से एक व्यक्ति को और भारत में हर 5 में से एक व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। इसलिए “फील नहीं होता” कह देना ही निदान नहीं है। बल्कि चेकअप करवाने से ही आप जान पाएंगे की वास्तविकता क्या है।

ग़लतफहमी : 35-40 वर्ष तक के व्यक्ति के लिए ब्लड प्रेशर की जांच महत्वपूर्ण नहीं है।

सच्चाई: बहुत सी मेडिकल एजेंसियां 18 वर्ष की आयु से ही ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण और उसका देख-रेख करने की सलाह देती हैं,  इससे भी पहले किशोरावस्था के दौरान, शारीरिक और यौन विकास भी ब्लड प्रेशर बढ़ने के मुख्य घटक हैं। इसलिए जितना जल्दी हो सके अपने ब्लड प्रेशर पर नजर रखना बेहद जरूरी होता है।

ग़लतफहमी: High Blood Pressure तो केवल या अधिकांशत: पुरुषों में होता है।

सच्चाई : महिलाओं में भी ब्लड प्रेशर की समस्या पायी जाती है ऐसी महिलाएं जो Overweight हैं, Birth Control Pills लेती हैं, प्रेग्नेंट हैं या उनके परिवार में किसी को ब्लड प्रेशर की दिक्कत रही है ऐसी सभी महिलाओं को भी अपने ब्लड प्रेशर पर नजर रखनी चाहिए।

ग़लतफहमी: मेरे तो परिवार में ही हाई ब्लड प्रेशर के बहुत से cases हैं इसलिए मैं इससे नहीं बच सकता और मुझे तो यह होना स्वाभाविक ही है।

सच्चाई: हो सकता है कि हाई  ब्लड प्रेशर आपके परिवार एक हिस्सा बन चुका हो और आपके नजदीकी रिश्तेदारों में यह समस्या आम हो लेकिन ऐसा नहीं है कि हाई ब्लड प्रेशर आपके भी जीवन का हिस्सा बने। अच्छी जीवन शैली, स्वस्थ खान पान और नियमित व्यायाम से हाई ब्लड प्रेशर से बचा जा सकता है।

ग़लतफहमी: मैंने दवाइयों से अपना ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल कर लिया है और अब मैं अच्छा फील करता हूँ मुझे अब दवाइयों की कोई जरुरत नहीं है।

सच्चाई: डॉक्टर द्वारा दी गयी मेडिसिन को अपनी मर्ज़ी से छोड़ने में समझदारी नहीं है बल्कि डॉक्टर की सलाह को पूर्ण रूप से मानने में ही भलाई है। अपनी इच्छा से दवा की मात्रा को कम करना या लेना बंद कर देना खतरनाक हो सकता है।

ग़लतफहमी: घर पर तो मेरा ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल में रहता है लेकिन डॉक्टर के पास ब्लड प्रेशर की रीडिंग ज्यादा आती है शायद डॉक्टर के पास जाना मुझे नर्वस कर देता है।

सच्चाई: हो सकता है कि डॉक्टर के पास जाने भर का ख्याल कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ा देता होगा लेकिन बार बार ली गयी रीडिंग्स को इग्नोर नहीं करना चाहिए। अच्छा यही है कि एक ब्लड प्रेशर को मापने की डिजिटल मशीन खरीद लें और घर पर ही नियमित रूप से रीडिंग्स नोट करें एवं अपने डॉक्टर के साथ शेयर करें।

ग़लतफहमी: सर्दी जुकाम की कोई भी दवाई मैं केमिस्ट से लेकर खा सकता हूँ।

सच्चाई: खुद डॉक्टर बनने से अच्छा है की डॉक्टर की सलाह लें सर्दी जुकाम की दवाईयों में Decongestant पाया जाता है अर्थात जो आपके नाक या छाती पर जमे congestion को de-congest  अर्थात melt करता है इन दवाइयों में उपस्थित Decongestant आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है इसलिए सर्दी जुकाम में भी कोई दवाई लेने से पहले केमिस्ट को अपने हाई ब्लड प्रेशर की जानकारी देकर यह सुनिश्चित कर लें कि उस दवाई में Decongestant नहीं हैं।

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