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Inspirational Story : 99 का फेर

99 ka fer
Hello Fellows,

एक बार एक राज्य का राजा जिसके पास धन दौलत की कमी नहीं थी नौकर-चाकरों की कमी नहीं थी वह जो बोलता वह हाजिर हो जाता जिस राज्य को जीतना चाहता वह जीत लेता।

एक बार वह अपने राज्य के कामकाज समाप्त करने के बाद अपने घर को वापस लौट रहा था और अपने महल में शयनकक्ष की तरफ जा रहा था तो उसने देखा कि एक नौकर जो साफ-सफाई भी कर रहा था और गाना भी गुनगुना रहा है अपने आप में बहुत खुश था चारों तरफ मुस्कान बिखेर रहा था। राजा को यह देखकर समझ नहीं आई कि नौकर होने के बावजूद भी इतना खुश है तो उसके मन में यह बात खटक गई कि जीवन में इतनी न्यून्ताएं होने के बावजूद भी यह खुश कैसे है?

राजा रानी के पास गया और उसने रानी से कहा- “आज मैंने देखा कि एक नौकर जो साफ-सफाई कर रहा था वह अत्यंत खुश प्रतीत हो रहा था राजा होने के बावजूद मैं जो चाहूं वह कर सकता हूं  जिस वस्तु की कामना मैं करूं वह वस्तु अपने सामने उपस्थित कर सकता हूं”

रानी ने कहा कोई बात नहीं, देख लेते हैं कि उसकी जो खुशी है वह वास्तविक है या नहीं रानी ने राजा को कहा कि क्यों ना हम उसे 99 की जमात में शामिल कर लें  तो राजा ने कहा- “अच्छा ऐसा क्या है ? रानी ने राजा से कहा कि अपने किसी नौकर को उसके घर के बाहर 99 सोने की मोहरें रखने के लिए भेज दीजिए।

तो राजा ने अपने एक नौकर को उस नौकर के घर के बाहर रात्रि में सोने की मोहरें रखने के लिए भेज दिया सवेरा हुआ उस नौकर की पत्नी जगी उसने दरवाजा खोला और देखा कि घर के बाहर कोई पोटली पड़ी है और उस पोटली में सोने की मोहरें है तो मन ही मन सोचने लगी कि अब तो हमारी जिंदगी बदल जाएगी अब हमें कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं रहेगी और पति से कहने लगी कि अब तुम चाहो तो नौकरी भी छोड़ सकते होउस नौकर ने गिनना शुरू किया  12345678…………..99 तक पहुंचा और सोचने लगा कि कोई भी व्यक्ति अगर मेरे घर के बाहर 99 सोने की मोहरें रखकर गया है तो 99 ही क्यों रखी है? यह तो 100 होनी चाहिए थी एक कम कैसे है?

जितनी भी उसके मन के अंदर संभावनाएं थी जहाँ जहाँ से मोहरें आ सकती थी वहां वहां वह गया महल तक कई चक्कर लगाए और उसे रास्ते में कोई भी सोने की मोहर नहीं मिली।  वह सेठ जी के घर पर गया कि एक वह भी स्थान है जहां से सोने की मोहरें हो सकती हैं अंतत: निराशा ही हाथ लगी, एक सोने की मोहर ने उसको इतना परेशान कर दिया कि अपने सारे कामकाज को भूल एक सोने के सिक्के के बारे में सोचने लगाराजा के महल में फिर से साफ सफाई करने गया तो राजा ने फिर से उसे देखा तो पाया कि हमेशा खुश दिखने वाला नौकर बहुत परेशान था जैसे कि कोई चिंता उसे खाई जा रही हो। 

राजा ने यह वृत्तांत भी रानी से जा कहा और वह बोली कि यही कारण है कि ज्यादातर लोग इस दुनियां में इसलिए खुश नहीं है कि जितना है वह उसे पर्याप्त नहीं मानते बल्कि हमेशा अल्पता का ही भाव उन्हें सारी उम्र खाता रहता है  हम अपने परिवार में देखें हमारे बहुत से रिश्तेदार हैं, शुभचिंतक हैं जो हमारे लिए अच्छा सोचते हैं लेकिन हमें चिंता किसकी है जो हमारा है ही नहीं। 

घर में हजार सुख सुविधाएं होने के बावजूद भी हम उस सुख की प्राप्ति करना चाहते हैं जिस सुख की प्राप्ति वास्तव में अभी संभव नहीं है  शायद यही कारण है कि हम 99 के फेर में उलझे हैं और वास्तविक सुख जो सगे-सम्बन्धियों, दोस्तों,परिवार, बच्चों के रूप में हमेशा उपलब्ध है वह महत्वता से परे है। 

अगर हम अपने जीवन में संतुष्टि का भाव लायें तो हमें हमेशा खुश रहने से कोई रोक नहीं सकता, कोई परेशानी हमें घेर नहीं सकती। 

क्योंकि इच्छाएं राजा की भी पूरी नहीं होती और जरूरतें फकीरों की भी अधूरी नहीं रहती 🙂

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